कोरबा-करतला। कोरबा जिले के करतला विकासखण्ड में अधिकतर विभागों के अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गयी है कि वे अक्सर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही करते नजर आते हैं। मामला है जनपद पंचायत करतला का जहाँ अधिकांश कर्मचारी अपने मुख्यालय में निवास नहीं करते हैं और बाहर से ही डयूटी आना जाना करते हैं जबकि कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास की व्यवस्था करतला में है उसके बावजूद अधिकांश कर्मचारी बाहर से ही आना जाना करते हैं। मुख्यालय में निवास नहीं करने व लेट से डयूटी आने के कारण जनपद क्षेत्र के बहुत सारे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राज्य की महत्वपूर्ण क्रियान्वयन एजेंसी जनपद पंचायत होता हैं जिसमें राज्य एवं राष्ट्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन जनपद पंचायत के माध्यम से किया जाता हैं ।अनेक योजनायें जैसे
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, सुखद सहारा पेंशन योजना,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन ,विधवा पेंशन , निःशक्त पेंशन योजना ,राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना,छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना,
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) PMAY,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन NRLM, जन्म-मृत्यु संबंधित जानकारी,स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत शौचालय संबंधित जानकारी,मनरेगा संबंधित जानकारी,श्रद्धांजलि योजना, मुख्यमंत्री पेंशन योजना ,राशन कार्ड की जानकारी आदि कार्य संचालित होते हैं लेकिन जनपद पंचायत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्क्रियता व मुख्यालय में नहीं रहने से कार्य काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। जबकि अधिकारी कर्मचारियों को अपने मुख्यालय या मुख्यालय से आठ किलोमीटर के अंदर निवास करने का नियम हैं । मुख्यालय में निवास नहीं करने के कारण कभी भी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते हैं । करतला जनपद अंतर्गत 78 ग्राम पंचायत आते हैं जहाँ शासन की समस्त योजनाओं की मॉनिटरिंग व समीक्षा करने व पंचायतों में निर्माण व विकास संबंधी कार्यों को निर्धारित समय मे पुरा करवाने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत की होती है लेकिन जब अधिकारी कर्मचारी खुद कर्तव्य के प्रति लापरवाह हो पंचायतों में कार्य समय से पूरा कहां से हो।
मुख्यालय से नदारत रहते हैं एसडीओ – कार्यालय में पूछने पर पता चलता हैं कि अनुविभागीय अधिकारी हमेशा फिल्ड में रहते हैं पर कभी कहीं भी फिल्ड में नजर नहीं आते और ना ही उनका फोन लगता हैं जबकि पुरे क्षेत्र में मोबाइल का कवरेज रहता हैं । अनुविभागीय अधिकारी कोरबा से आना जाना करते हैं और सप्ताह में सिर्फ एक दिन महज कुछ घंटे कार्यालय में बैठकर रवाना हो जाते हैं। जिससे विभाग के कार्य काफी प्रभावित हो रहे हैं। किसी अधिकारी के इस तरह से मनमानी तरीके से शासकीय सेवा में होते हुए मुख्यालय में निवास नहीं करना कही न कहीं शासकीय कार्य मे लापरवाही की श्रेणी में आता है।
अब देखना है कि समाचार प्रकाशन के बाद प्रशानिक अमला हरकत में आता है और व्यवस्था में सुधार होता है या नहीं।







