👉🏻 मामला- अटल जी की गुणवत्ताहीन प्रतिमा का,24 जुलाई के पत्र में 27 जुलाई को हुए निरीक्षण का जिक्र!
👉🏻उप अभियंता निलंबित, लेकिन मुख्य जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल
कोरबा-कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 02 में अटल परिसर निर्माण और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापना में गुणवत्ता को लेकर आई शिकायत की जारी जांच और कार्रवाई की अटकलों के बीच एकाएक वायरल हुआ एक पत्र चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को मोहरा बनाकर निलंबित कर दिया गया है तो दूसरी तरफ सर्वाधिक जिम्मेदार मुख्य नगर पालिका अधिकारी पर अब तक कोई आंच नहीं आई है। चर्चा है कि उन्हें बचाने के लिए बिलासपुर से लॉबिंग हो रही है। इस बीच दफ्तर से निकल कर सोशल मीडिया के गलियारों में घूमता यह प्रशासनिक पत्र चर्चा का विषय है। सत्यसंवाद इस वायरल पत्र के वैधानिकता की पुष्टि नहीं करता। यदि ऐसा कोई पत्र है, तो जांच भी होना चाहिए। दूसरी तरफ, यह जानकारी मिल रही है कि अटल प्रतिमा के मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने एक पत्र छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को प्रेषित करते हुए कठोर कार्रवाई, FIR और ठेकेदार फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश जारी किए हैं। कोरबा कलेक्टर को भी पत्र राज्य शासन के संचालनालय द्वारा प्रेषित किए जाने की जानकारी मिल रही है। हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि होना शेष है किंतु यह तय है कि आगामी दिनों में इस प्रकरण में FIR और ब्लैक लिस्ट करने की करवाई होनी है। अब देखना है कि यह गाज किस-किस पर गिरती है। इस सुगबुगाहट ने संबंधित लोगों की नींद उड़ा दी है।
✍🏻पत्र में क्या लिखा है?
जारी पत्र क्रमांक 1113/तक.शा./नपा/2026, दिनांक 24.07.2026 में नगर पालिका ने लिखा है कि वार्ड क्रमांक 02 में अटल परिसर निर्माण एवं प्रतिमा स्थापना के लिए आमंत्रित निविदा में ठेकेदार की दर न्यूनतम होने के कारण अनुबंध निष्पादन के बाद कार्यादेश जारी किया गया था और कार्य पूरा किया जा चुका है।
पत्र के मुताबिक, 27.07.2026 को जनप्रतिनिधि, सीएमओ स्वयं तथा उप अभियंता के संयुक्त निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि अटल जी की प्रतिमा निर्धारित मानक के अनुरूप तैयार नहीं की गई है। प्रतिमा के कई स्थानों पर पपड़ी के रूप में धातु निकल रहा है। इसके बाद ठेकेदार को निर्देश दिया गया है कि स्थापित प्रतिमा के स्थान पर निर्धारित प्राक्कलन के अनुरूप प्रतिमा तैयार कराकर स्थापित करें, अन्यथा निविदा एवं अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।
📆लेकिन असली सवाल पत्र की तारीख पर!
वायरल पत्र में सबसे बड़ा सवाल उसकी तारीख को लेकर खड़ा हो रहा है। पत्र के शीर्ष पर जारी करने व नीचे लगी मुख्य नगर पालिका अधिकारी की मुहर पर तारीख 24 जुलाई 2026 दर्ज है, जबकि पत्र के मुख्य हिस्से में लिखा गया है कि 27 जुलाई 2026 को संयुक्त निरीक्षण किया गया।
यानी जिस निरीक्षण को आधार बनाकर ठेकेदार को पत्र जारी किया गया, वह निरीक्षण पत्र जारी होने की तारीख के तीन दिन बाद होना बताया गया है।
🤔अब सवाल यह है कि
24 जुलाई को जारी पत्र में 27 जुलाई को होने वाले निरीक्षण का उल्लेख कैसे हुआ?
क्या पत्र बाद में तैयार किया गया और पुरानी तारीख में जारी दिखाया गया?
या फिर पत्र में तारीख लिखने में गंभीर प्रशासनिक चूक हुई?
और यदि यह महज टाइपिंग अथवा तारीख की गलती है तो इसे सुधारने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
यही तारीख अब अटल प्रतिमा विवाद की जांच के बीच सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गई है।
👉🏻उप अभियंता निलंबित, CMO पर सवाल क्यों नहीं?
अटल प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर कार्रवाई के बीच उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को निलंबित किए जाने के बाद अब नगर पालिका की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि प्रतिमा निर्माण और स्थापना जैसे कार्य में केवल तकनीकी अमला ही नहीं, बल्कि निविदा, कार्यादेश, अनुबंध, कार्य की निगरानी, माप एवं भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े कई स्तर होते हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि यदि प्रतिमा निर्धारित मापदंड के अनुरूप नहीं बनी तो जवाबदेही केवल उप अभियंता तक सीमित क्यों दिखाई दे रही है? सबसे महत्वपूर्ण सवाल नगर पालिका के तत्कालीन/वर्तमान मुख्य नगर पालिका अधिकारी की भूमिका और निगरानी को लेकर उठ रहा है।
👉🏻एक पत्र, दो तरह की चर्चाएं
वायरल पत्र को लेकर नगर पालिका और राजनीतिक गलियारों में दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
पहली चर्चा यह है कि पत्र के जरिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी यह रिकॉर्ड पर लाना चाहते हैं कि प्रतिमा की खराब गुणवत्ता सामने आते ही उन्होंने ठेकेदार को नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दे दिए थे। यानी आगे चलकर यदि जिम्मेदारी तय होती है तो वे अपने स्तर पर कार्रवाई करने का दस्तावेजी आधार प्रस्तुत कर सकें।
दूसरी और ज्यादा गंभीर चर्चा यह है कि मामले की लीपापोती अथवा जिम्मेदारी सीमित करने की कोशिश में तैयार किया गया यह पत्र खुद ही तारीखों के विरोधाभास में फंस गया और अब यही पत्र कई सवालों का आधार बन गया है।
इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन वायरल प्रशासनिक पत्र ने इन सवालों को जरूर हवा दे दी है।
बिलासपुर से लॉबिंग की भी चर्चा
इधर स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी को कार्रवाई से बचाने के लिए बिलासपुर स्तर से लॉबिंग की जा रही है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने नहीं आया है। यदि ऐसी किसी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक पैरवी की बात सही है तो यह भी जांच का विषय होगा कि तकनीकी अधिकारी पर कार्रवाई के बावजूद निर्णय प्रक्रिया के उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों की भूमिका की जांच किस स्तर तक की गई।
👀 अब जांच की निष्पक्षता पर निगाह
अटल परिसर और प्रतिमा निर्माण का मामला अब सिर्फ प्रतिमा की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गया है। मामला निविदा, प्राक्कलन, अनुबंध, कार्यादेश, तकनीकी निगरानी, भुगतान और अधिकारियों की जवाबदेही तक पहुंच गया है।
🫵🏻उभरते सवाल
प्रतिमा के लिए निर्धारित मानक और प्राक्कलन क्या था?
ठेकेदार ने उसके अनुरूप प्रतिमा क्यों नहीं बनाई?
प्रतिमा की गुणवत्ता की जांच कार्य पूर्ण होने से पहले क्यों नहीं हुई?
कार्यादेश और भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने क्या भूमिका निभाई?
उप अभियंता के अलावा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हुई या नहीं?
24 जुलाई के पत्र में 27 जुलाई के निरीक्षण का उल्लेख कैसे आया?
यदि यह तारीख की गलती है तो इसे आधिकारिक रूप से सुधारा क्यों नहीं गया?
और यदि पत्र बाद में तैयार किया गया तो उसमें 24 जुलाई की तारीख क्यों दर्ज की गई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अटल प्रतिमा की गुणवत्ता की जांच वास्तव में जिम्मेदारी तय करने के लिए हो रही है या जिम्मेदारी को सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित करने के लिए?







