👉🏻जनपद पंचायत करतला की जांच टीम ने कथरीमाल में किया सत्यापन, मौके पर शिकायत की पुष्टि
👉🏻 आखिर किस-किस पर तय होगी जवाबदेही, सरपंच-सचिव से लेकर सीईओ कैसे रहे अंजान… बड़ा सवाल ?
कोरबा-करतला। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े उजागर हो रहे फर्जी जियो टैग से अपूर्ण आवासों को भी पूर्ण बताकर आर्थिक घोटाले की कड़ी में योजना की प्रारम्भिक कड़ी “आवास मित्रों” का भी फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। नियुक्ति किसी की, फील्ड में कार्यरत कर्मचारी कोई और को लेकर ‘सत्य संवाद’ द्वारा प्रकाशित खबर पर अब जांच में भी मुहर लगती दिखाई दे रही है। प्रकाशित समाचार “आवास घोटाले में ट्विस्ट: नियुक्ति किसी और की, फील्ड में काम कर रहा दूसरा व्यक्ति” शीर्षक से खबर के बाद जनपद पंचायत करतला ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय/तीन अलग-अलग जांच टीमों का गठन किया।
इसी क्रम में गठित एक जांच टीम ने ग्राम पंचायत कथरीमाल पहुंचकर मामले का जमीनी सत्यापन किया। जांच टीम में वरिष्ठ करारोपण अधिकारी उदय सिंह कंवर एवं तकनीकी सहायक प्रफुल्ल दीक्षित शामिल रहे। टीम ने संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करने के साथ मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ भी की।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि फील्ड में कार्य वास्तव में वही व्यक्ति कर रहा है जिसकी नियुक्ति नहीं हुई है, जबकि नियुक्ति अभिलेखों में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है। प्रारंभिक जांच में शिकायत के प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
इस खुलासे के बाद संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया, कार्य आवंटन और शासकीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जनपद पंचायत की शेष जांच टीमों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि सभी जांचों में यही तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि शासकीय योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
👉🏻इसी कड़ी में एक बड़ा सवाल यह भी उभर कर सामने आ रहा है कि क्या पंचायतों में नियुक्त आवास मित्रों के संबंध में सरपंच- सचिव,उपसरपंचों, पंचों और जनपद की बैठकों में उपस्थित होने के दौरान उनके बारे में जानकारी संबंधित अधिकारियों को, मैदानी अधिकारियों को नहीं रहती! आखिर इस तरह का फर्जीवाड़ा क्यों और किसके संरक्षण व शह में होता आ रहा है, यह भी गहन जांच का विषय है। साथ ही देखना यह होगा की कार्रवाई की गाज सिर्फ नियुक्त और फर्जी आवास मित्र पर गिरती है या फिर किसी और भी पर जिम्मेदारियां होगी? क्या वह भी कार्रवाई की जद में आएंगे? इनके माध्यम से अब तक किए और कराए गए फर्जीवाड़े पर क्या होगा? फर्जी जिओ टैगिंग के माध्यम से आवास के नाम पर सरकारी धन का गलत तरीके से आहरण किया गया है, उसका क्या होगा?


















