👉🏻 23 जुलाई को थी जयंती, उसी दिन नई टीम को डिप्टी सीएम ने दिलाई शपथ
👉🏻 मंच पर बिखरे कांग्रेस-भाजपा के राजनीतिक रंग लेकिन तिलक जी कहीं नहीं
कोरबा। गुरुवार 23 जुलाई 2026 को कोरबा जिले के विकास कार्यों की कड़ी में नया अध्याय प्रभारी मंत्री अरुण साव ने जोड़ा। 73 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन करने के साथ ही उन्होंने विभिन्न आयोजनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे पहले वे कोरबा प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ समारोह कार्यक्रम में शामिल हुए। निगम के पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में समस्त पदाधिकारी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। यह कार्यक्रम शपथ से ज्यादा मंच पर अतिथि के तौर पर मौजूद पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल एवं वर्तमान मंत्री अरुण साव के द्वारा विकास कार्यों खासकर खराब सड़कों और जाम की समस्या से कोरबा के हालातों पर टीका- टिप्पणी को लेकर चर्चा में रही।
मंचीय कार्यक्रम के दौरान मंच पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ गणमान्यजनों और वरिष्ठ पत्रकारों की भी उपस्थित रही। इस कार्यक्रम को लेकर जो एक चर्चा अलग से पत्रकारों सहित नगर के गणमान्यजनों के बीच तैर रही है, वह यह है कि प्रेस क्लब के शपथ समारोह में मां भारती और मॉं वीणापाणी सरस्वती को तो नमन किया गया किन्तु पत्रकारिता के पुरोधा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी को कैसे भुला दिया गया! 23 जुलाई तिलक जी की जयंती का दिन था और इसी दिन कोरबा प्रेस क्लब के शपथ कार्यक्रम का अवसर रहा लेकिन यह चौंकाने वाला विषय है कि मंच पर ना तो लोकमान्य तिलक का कोई छायाचित्र दूर-दूर तक नजर आया, और ना ही किसी तरह से उन्हें याद किया गया, न इस खास मौके पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। सच तो यही है कि, किसी को यह याद ही नहीं था। भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ सम्भवतः उपस्थित मूर्धन्य पत्रकारों ने भी नहीं। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक कलमकारों के लिए पूजनीय हैं। कोरबा के पत्रकारों से गहरे तक वास्ता रखने वाले नगर के गणमान्यजनों में चर्चा तो यह भी रही कि अगर यह शपथ कार्यक्रम प्रेस क्लब के अपने सुसज्जित व सर्व सुविधायुक्त तिलक भवन में कराया गया होता तो वहां तिलक जी की जयंती भी शायद याद कर ली गई होती।
वैसे तो, नेतागण महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों के साथ पोस्ट डालकर जनता के बीच सक्रियता और महापुरुषों के प्रति श्रद्धा भाव दिखाने से नहीं चूकते। यह विस्मयकारी है कि सक्रिय रहने वाले दोनों दलों के नेताओं के साथ-साथ अन्य किसी को यह तक याद नहीं रहा की जिन पत्रकारों को उनके पद की शपथ दिलाई जा रही है, उनके लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भीबपूजनीय हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने भी इस विषय पर न कोई गंभीरता दिखाई और ना उन्हें यह सब कुछ याद रहा कि आज लोकमान्य तिलक की जयंती भी है।
हालांकि कार्यक्रम गरिमामयपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ/भव्य तरीके से आयोजित हुआ लेकिन कार्यक्रम के बाद जहां इसके राजनीतिकरण ने सवाल छोड़ दिए वहीं यह भी एक बड़ा सवाल कि आखिर जब सारे कार्यक्रम शहर में ही तय थे, और आयोजन स्थलों के निकट में ही निगम का खुद का पंचवटी विश्राम गृह, सीएसईबी का सीनियर क्लब व रेस्ट हाउस है तो भला, एनटीपीसी की दूरी क्यों तय कराई गई?








