कोरबा-कटघोरा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कटघोरा तहसील क्षेत्र से राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों द्वारा नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंका गहराती जा रही है।
मामला तहसील क्षेत्र के ग्राम डुडगा का है, जहां राजेश डिक्सेना अपनी निजी भूमि पर मकान का निर्माण करा रहे थे। इसी दौरान छत बाई, पति रामदुलारे कुर्रे द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। आरोप है कि तहसीलदार ने बिना किसी विस्तृत जांच के मात्र आवेदन के आधार पर ही 24 मार्च 2026 को स्थगन आदेश जारी कर दिया।
इतना ही नहीं, पीड़ित पक्ष द्वारा मौखिक आपत्ति जताने पर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उसी दिन हल्का पटवारी (प.ह.न. 9) द्वारा बिना मौके पर निरीक्षण किए, ग्राम कोटवार के घर में बैठकर ही कथित तौर पर पंचनामा तैयार कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इसे जांच का विषय बताया जा रहा है।
वहीं, इसी मामले से जुड़े एक अन्य पहलू ने प्रशासन की निष्पक्षता पर और भी संदेह पैदा कर दिया है। तहसीलदार कटघोरा के वाचक नागेंद्र डिक्सेना के खिलाफ अतिक्रमण की शिकायत उच्च अधिकारियों द्वारा मार्क की गई थी, जो 16 अप्रैल 2026 को तहसील कार्यालय पहुंच चुकी है। बावजूद इसके, अब तक अवैध अतिक्रमण के खिलाफ न तो कोई प्रकरण न्यायालय में दर्ज किया गया है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
इस बीच, राजस्व निरीक्षक द्वारा नक्शा उपलब्ध न होने का हवाला दिया जा रहा है, जिससे कार्रवाई में और देरी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम नागरिक के मामले में बिना जांच के तत्काल आदेश जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई लंबित रखी जा रही है। पूरे घटनाक्रम ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि उच्च प्रशासन इस मामले में क्या संज्ञान लेता है और क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।





