कोरबा-दीपका। एसईसीएल दीपका क्षेत्र के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) मद से परियोजना प्रभावित ग्राम हरदी बाज़ार में ग्रामीणों, महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10 सीसीटीवी कैमरा दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय कुमार मिश्रा के द्वारा ग्राम पंचायत हरदी बाज़ार के सदस्यों को उपलब्ध कराया गया।
क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि दीपका क्षेत्र के द्वारा कोयला उत्पादन के साथ-साथ आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआर के तहत विभिन्न कार्यों के द्वारा सतत विकास का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा इस पहल के लिए एसईसीएल का आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम का आयोजन दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय स्तर की सीएसआर समिति के मार्गदर्शन में किया गया। इस कार्यक्रम मे दीपका क्षेत्र के विभागाध्यक्ष, नोडल अधिकारी (सीएसआर), ग्राम हरदी बाज़ार के वार्ड पंच एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
0 मशरूम की खेती से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से, एसईसीएल दीपका क्षेत्र द्वारा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) अंतर्गत ग्राम रतिजा में परियोजना प्रभावित ग्रामों रतिजा, चैनपुर, हरदी बाज़ार व सरईसिंगार के स्वयं सहायता समूहों के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि एसईसीएल दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय कुमार मिश्रा, विशिष्ट अतिथि ग्राम रतिजा की सरपंच श्रीमती कविता कंवर, मशरूम उत्पादन प्रशिक्षक श्रीमती परमेश्वरी सिंह, दीपका क्षेत्र के स्टाफ अधिकारी (सिविल), स्टाफ अधिकारी (एचआर), नोडल अधिकारी (सीएसआर), विभिन्न स्वयं सहायता समूह एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
श्रीमती परमेश्वरी सिंह ने दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे महिलाओं को ऑस्टर और पैरा मशरूम की खेती की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुये उन्हें प्रैक्टिकल करके भी दिखाया कि कैसे मशरूम की खेती की जाती है । साथ ही यह भी बताया कि पैरा मशरूम की खेती मार्च से अक्तूबर तक की जा सकती है परंतु मशरूम की खेती योग्य तापमान और आद्रता बनाए रखने पर इसकी खेती साल भर की जा सकती है। मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम से मशरूम खेती से जुड़ी पूरी जानकारी और तकनीकी कौशल प्रदान किया गया, जिससे स्वयं सहायता समूहों के महिलाएं मशरूम उत्पादन कर अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं और क्षेत्र के आर्थिक विकास में सहायक बनेंगी।







