कोरबा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम धोबीबारी में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांव के आदिवासी पंडो परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। दिन में भय और रात में जागकर पहरा, यही अब उनकी दिनचर्या बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और जिला प्रशासन ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। उनका कहना है कि हाथियों ने उनके आशियाने, राशन और घरेलू सामान सब कुछ तबाह कर दिया, लेकिन अब तक पर्याप्त राहत नहीं मिल सकी है।
धोबीबारी, ग्राम कटोरी नगोई से करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। पिछले सप्ताह हाथियों के दल ने गांव में जमकर उत्पात मचाया और सात परिवारों के कच्चे मकानों को ढहा दिया। घटना को चार से पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके पास न चावल बचा है, न दाल और न ही सब्जियां। सिर ढकने के लिए छत तक नहीं है। मजबूरी में परिवारों ने पेड़ों के नीचे अस्थायी आश्रय बना लिया है।
👉🏻वन विभाग ने दिया सीमित राहत
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत व वन विभाग की ओर से चावल और थोड़ा बहुत दाल उपलब्ध कराया गया है। साथ ही प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक कंबल दिया गया है ताकि ठंड से कुछ राहत मिल सके। जटगा रेंज के डिप्टी रेंजर नेपाल सिंह ने बताया कि यह दुर्गम और घने जंगल का क्षेत्र है, जहां हाथियों को पूरी तरह खदेड़ पाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को लगातार समझाइश दी जा रही है कि वे हाथियों से दूरी बनाए रखें ताकि जनहानि से बचा जा सके। विभागीय टीम मौके पर सक्रिय है और उच्च अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान और पर्याप्त राहत नहीं मिलती, तब तक उनका जीवन सामान्य नहीं हो पाएगा। खुले आसमान के नीचे गुजर रही रातें और बच्चों की भूख गांव की पीड़ा को बयां कर रही है। फिलहाल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां जारी हैं, लेकिन हाथियों की मौजूदगी से डर अब भी कायम है।
KORBA:आंशिक रूप से जागा वन विभाग,खबर प्रकाशन के बाद धोबीबारी में दिखी हरकत






