👉🏻 सुबह से रात तक शराब दुकानों के कारण उमड़ती भीड़ से बढ़ती दहशत
👉🏻 मुख्य मार्ग, टीपी नगर, मुड़ापार, निहारिका में अमनपसंद और व्यापारी परेशान
👉🏻 आबकारी और पुलिस की सुस्त कार्रवाई को लोग ठहरा रहे जिम्मेदार
कोरबा। सरकार खुद ही नशा बिकवा रही है तो भला हम क्या करें, कितने लोगों की धरपकड़ करें, नशेड़ियों को जेल भेज नहीं सकते, लॉकअप में रख नहीं सकते, उन पर सख्ती कर नहीं सकते…., बाकी रोज कार्रवाई तो कर ही रहे हैं।
यह आमतौर पर उन चंद पुलिस अधिकारियों और कर्मियों का जुमला है जो कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं और अपने थाना क्षेत्र में अपराध का ग्राफ बढ़ते हुए नहीं दिखाना चाहते।
दूसरी तरफ अवैध शराब बिक्री और सार्वजनिक स्थान पर पीने की धरपकड़ के मामले में कार्रवाई करने का मुख्य विभाग आबकारी विभाग है लेकिन वह भी लगभग सारा कुछ दारोमदार पुलिस वालों पर ही छोड़कर मलाई खाने में लगा हुआ है। यह कहने में कोई संदेह नहीं की वर्षों पहले जिस तरह से आबकारी अमला अवैध नशा की बिक्री और वैध नशा का सार्वजनिक स्थान पर इस्तेमाल को लेकर गंभीर हुआ करता था, वैसा कई वर्षों से नजर नहीं आ रहा है। आबकारी विभाग के दामन खुली छूट और कार्रवाई को लेकर अवैध वसूली के मामले में ज्यादा दागदार होते रहे हैं।
कुछ यह कारण और बहुत कुछ नशेड़ियों की बढ़ती निरंकुश्ता, वैध और अवैध नशा की सहज उपलब्धता की वजह से (ग्रामीण और आउटर के क्षेत्र की बात छोड़ दें तो) शहर के मध्य ऐसे इलाके जो थाना- चौकी नजदीक हैं, पुलिस की पहुंच बहुत ही सरल है, वहां दोपहिया बाइक में पेट्रोलिंग करते हुए घूम सकते हैं, चार पहिया गाड़ी आसानी से पहुंच सकती है, उन इलाकों में भी लोग नशेड़ियों की हरकतों की वजह से भयाक्रांत हैं। शाम होते-होते यह नजारा और भी भयभीत करने वाला होने लगता है क्योंकि अंधेरा गहराने के साथ ही इस तरह की प्रवृत्तियां और सक्रिय हो जाती हैं। तब अमन पसंद लोग किसी घटना-दुर्घटना- वारदात, अपने जान-माल को लेकर चिंतित नजर आते हैं। यह तब हो रहा है जब पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ऐसी गतिविधियों के सख्त खिलाफ हैं और उनके दाएं-बाएं हाथ की तरह काम करने वाले एएसपी और सीएसपी सक्रिय हैं।
👉🏻 बीच शहर ओपन बार, विक्षिप्त भी पैग लगाते
कोरबा मुख्य शहर,टीपी नगर और मुड़ापार जैसे भीड़-भाड़ वाले व्यस्त इलाकों में ओपन बार-सा नजारा सहज ही देखने को हर दिन मिलता है। मुख्य शहर में खुली अंग्रेजी शराब दुकान को हटाने की मांग बार-बार हो रही है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने भी निर्देश दे दिए हैं। विभाग ने नए स्थान की तलाश के लिए विज्ञापन का प्रकाशन कर दिया है। सारा कुछ दायरे में सिमटा हुआ है जबकि लोगों का तर्क है कि आउटर में कितनी सारी सरकारी जमीन खाली है जो अवैध कब्जे की चपेट में है। वहां यदि प्रशासन चाहे तो खुद की दुकान बनवाकर हमेशा के लिए शराब दुकान वहां खुलवा सकता है जिससे शहर के भीतर से यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। दूसरी तरफ शहर की दुकान में शराब खरीदने के बाद सड़क पर ही खुला बार की तरह लोग शराब का सेवन करते नजर आते हैं। हद तो तब होती है जब ऐसे लोग नशा चढ़ते ही उटपटांग हरकतें/ विवाद करना शुरू कर देते हैं, कई बार ऐसे हालात निर्मित हुए हैं। ऐसे हालात की वजह से भय का माहौल तो बना ही रहता है, सड़क पर जाम सुबह से लेकर रात तक लगता है। आवागमन की दिक्कत होती है, कोई यदि इनसे उलझे तो बेवजह का विवाद भी सहना पड़ता है। हर वक्त अप्रिय स्थिति की आशंका से स्थानीय व्यापारी भयभीत रहते हैं। काम करने वाली/ सड़क से गुजरने वाली महिलाओं/युवतियों को अमर्यादित आचरण सहने और भद्दे-भद्दे शब्दों को सुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। टीपी नगर क्षेत्र में भी ओपन बार की तरह लोग शराब पीते नजर आते हैं। इतना ही नहीं सड़क पर घूमते विक्षिप्त भी मदिरापान करते दिखते हैं तो यह भय अनायास कायम हो जाता है कि यह कहीं कुछ हरकत न कर दे।
गीला-सूखा व तरह-तरह के नशा की आगोश में घूम कर आतंक फैलाते लोगों पर कमजोर सख्ती और शराब दुकानों के आसपास कमजोर गश्त के कारण अमन पसंद लोग खासकर व्यापारी वर्ग काफी परेशान हो चले हैं।
👉🏻 मुड़ादाई तालाब भी बड़ा उदाहरण
कोतवाली थाना अंतर्गत मानिकपुर पुलिस चौकी क्षेत्र की मुड़ापार शराब दुकान के आसपास में भी ऐसा ही नजारा दिखता है। शारदा विहार कॉलोनी स्थित मुड़ादाई तालाब भी खुला नशा का उदाहरण बन चुका है। नगर निगम द्वारा सौंदर्यीकरण के बावजूद यह स्थान अब नशेड़ियों और गुंडा तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम 7 बजे के बाद यहां बाहरी और स्थानीय नशेड़ी युवकों का जमावड़ा लगने लगता है। मुड़ादाई मंदिर परिसर से लगे इस क्षेत्र में आए दिन नशे की हालत में विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं। जिससे माहौल पूरी तरह असुरक्षित बना हुआ है। मुड़ापार बाजार स्थित दशहरा मैदान के पास बने नगर निगम के कॉम्प्लेक्स का हाल भी कुछ अलग नहीं है। बंद पड़ी दुकानों के आसपास देर रात तक नशेड़ियों का डेरा लगा रहता है। अवैध गांजा बिक्री से भी चौतरफा माहौल बिगड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांजा का अवैध कारोबार के चलते आसपास और दूसरे क्षेत्रों से भी नशेड़ी यहां पहुंचते हैं। आसानी से नशा उपलब्ध होने के कारण शहर क्षेत्र के अनेक इलाके नशाखोरी का केंद्र बनते जा रहे हैं।






