👉🏻 SIR के दौरान 2003 की जानकारी देने वाले भी दौड़ रहे
👉🏻 सुनवाई के दौरान कई के दस्तावेज अस्वीकार किए जा रहे
👉🏻निरक्षर,दिवंगत माता-पिता का कहां से लाएं कोई दस्तावेज
कोरबा। भारत व राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार एसआईआर विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। पहले चरण का कार्य संपन्न होने के बाद अब दावा-आपत्ति ली जा रही है। साथ ही ऐसे वोटरों को नोटिस जारी कर उनकी सुनवाई अलग-अलग तिथि में की जा रही है जिन्होंने वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं अथवा अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया था। ऐसे वोटर सी- श्रेणी में रखे गए हैं किंतु सी वोटरों के साथ-साथ ए और बी कैटिगरी के वोटरों को भी नोटिस दिए जाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। वहीं बीएलओ को भी खरी-खोटी सुननी पड़ रही है।
👉🏻 A-B-C वोटर कौन

ए वोटर ऐसे वोटर हैं जिनका नाम वर्ष 2025 की मतदाता सूची के साथ-साथ वर्ष 2003 की सूची में भी दर्ज है। बी कैटिगरी ऐसे वोटर हैं जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में तो नहीं है लेकिन उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम जरूर दर्ज रहा है। इस तरह ए और बी कैटिगरी के वोटरों की प्रमाणिकता मात्र वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से हो चुकी है जिसका विवरण SIR पत्रक में भरा गया। अब ऐसे वोटर जिनके खुद के नाम अथवा उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें वोटर लिस्ट में नाम कायम रखने हेतु अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी गणना पत्रक में दर्शित 11 प्रकार के दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज निर्धारित जन्म वर्ष और तिथि के अनुसार प्रस्तुत करते हुए वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने की कवायद करना है।
इसके विपरीत सी वोटरों के साथ-साथ ए और बी वोटरों को भी नोटिस जारी कर दिए जाने से यह न सिर्फ हलाकान हो रहे हैं बल्कि व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्होंने 2003 की मतदाता सूची में अपना या माता-पिता, दादा-दादी का नाम होने का प्रमाण दे दिया है तो फिर नोटिस क्यों?
👉🏻 इसलिए दी जा रही है नोटिस

- आपके विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चल रहा है। आपका विधिवत हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र प्राप्त हो गया है। जांच के बाद, यह पाया गया है किः
आपने अपने या अपने रिश्तेदार से संबंधित विवरण नहीं भरा है, जो आपको या आपके रिश्तेदार को पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान तैयार की गई निर्वाचक नामावली में एक पंजीकृत निर्वाचक के रूप में स्थापित कर सके। - पिछले (एसआईआर) के दौरान तैयार की गई निर्वाचक नामावली से कोई मिलान न होने/गलत मिलान होने की संभावना को देखते हुए, आपसे अनुरोध है कि आप अपना नाम अंतिम निर्वाचक नामावली में बनाए रखने के लिए, ईसीआई द्वारा बताए गए मूल दस्तावेज़ (जो गणना प्रपत्र के पीछे की जानकारी शीट में दिए गए हैं और इस नोटिस के साथ संलग्न हैं) के साथ मेरे समक्ष उपस्थित हों।
👉🏻 क्या बता रहे वोटर,इनके नाम कटने का अंदेशा
नोटिस मिलने के बाद सुनवाई के लिए संबंधित दफ्तर पहुंचे ए कैटेगरी के 50 वर्षीय एक वोटर ने बताया कि उनके पास ना तो खुद का कोई दस्तावेज है और ना ही माता-पिता का स्कूल सर्टिफिकेट या कुछ और। निजी जमीन संबंधी ऋण पुस्तिका है जो अस्वीकार हुआ है। आधार कार्ड, पैन कार्ड स्वीकार नहीं किया जा रहा जबकि उन्होंने SIR के दौरान 2003 में अपना नाम मतदाता सूची में होने का प्रमाण दे दिया है, अब कह रहे हैं कि कोई दस्तावेज लेकर आओ, तो मैं कहां से लाऊं…? बी कैटेगरी की एक महिला मतदाता को यह कह कर लौटा दिया कि वह अपना कोई भी अंक सूची लेकर आए जबकि वह महिला पढ़ी-लिखी नहीं है, ना तो उसके माता-पिता ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाया न ही निवास और न ही जाति प्रमाण पत्र। सरकारी जमीन का कोई पट्टा, वन अधिकार पत्र आदि नहीं है, हालांकि 2003 की मतदाता सूची में उसके माता-पिता का नाम जरूर है जो उसने SIR के दौरान पत्रक भरते समय दे दिया था।
सी कैटेगरी की एक युवा मतदाता ने बताया कि बचपन में ही उसके पिता का देहांत हो गया, पिता से संबंधित कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। मां भी पढ़ी-लिखी नहीं है, वोटर के पास सिर्फ उसका स्कूल का सर्टिफिकेट है इसके अलावा आधार कार्ड, लेकिन यह कोई भी दस्तावेज मान्य नहीं किए जा रहे हैं। कमोबेश इसी तरह की समस्या नोटिस प्राप्त बहुत से मतदाताओं के साथ है। ऐसे लोगों को सुनवाई के दौरान सीधे कहा जा रहा है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में रह पाना मुश्किल है।
👉🏻 नोटिस निरस्त करने अधिवक्ता ने दिया आवेदन

एसआईआर की कड़ी में नोटिस प्राप्त करने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण अग्रवाल ने उन्हें प्राप्त नोटिस को निरस्त करने के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि वे 75 वर्षीय सीनियर सिटीजन हैं व 50 वर्षों से विधिक व्यवसाय (वकालत) कर रहे हैं। एस.आई.आर. के तहत निर्धारित फार्म की पूर्ति हेतु बी.एल.ओ. मुकेश कुमार पाटले, आवेदक के निवास में आकर समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति सहित उक्त फार्म पूर्ण कराकर हस्ताक्षर लेकर गए थे। उपरोक्त के बावजूद संदर्भित नोटिस मिलने व दिनांक 14/01/2026 पर 12 से 02:30 बजे के मध्य टी.पी. नगर जोन कार्यालय कोरबा में उपस्थित होने हेतु उल्लेखित किया गया है। जिससे आवेदक को घोर मानसिक प्रताड़ना से पीड़ित होना पड़ रहा है व आवेदक के विधिक व्यवसाय (वकालत) में बाधा होना प्रकट है। जब बी.एल.ओ. ने ही समस्त औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए निर्धारित फार्म भरवाकर हस्ताक्षर कर ले जाया गया है, जिससे प्रेषित नोटिस औचित्यहीन होना दर्शित है। उपरोक्त परिस्थितियों में, न्यायहित में, संदर्भित नोटिस निरस्त किया जाना अथवा वापस लिया जाना न्यायोचित होगा व संबंधित बी.एल.ओ. से सम्पूर्ण जानकारी लेना भी न्यायसंगत होगा।
👉🏻 लॉजिकल त्रुटि सामान्य बात
कुछ बीएलओ ने चर्चा में बताया कि उन्होंने प्रत्येक पत्रक का बारीकी से सत्यापन किया है। निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2003 में दर्ज मतदाताओं के नाम, उपनाम अथवा उनके रिश्तेदार के नाम में वर्तनीगत त्रुटियों के कारण 2025 की मतदाता सूची से मिलान न होने को लेकर इसे लॉजिकल त्रुटि की श्रेणी में रखा गया है। यह टंकण की त्रुटि है जिसकी वजह से अक्षरों के मिलान/मात्राओं में त्रुटि से उसके हिन्दी-अंग्रेजी ट्रांसलेट के कारण थोड़ी बहुत दिक्कत आती है। ऐसी त्रुटि वाले चिन्हित मतदाताओं के नाम का सत्यापन निर्वाचन आयोग के द्वारा पूर्व में बीएलओ से करा लिया गया है। इसके बावजूद ए और बी कैटेगरी के मतदाताओं को पिछले और वर्तमान सूची से मिलान न होना कारण बताकर नोटिस इन्हें भी जारी कर दिया गया है जिससे कि वह अब मांगे जा रहे दस्तावेज उपलब्ध न करा पाने के कारण असमंजस की स्थिति में आ चुके हैं कि उनका नाम वोटर लिस्ट में रहेगा या नहीं! क्योंकि उनके पास तो 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नाम की लिस्ट के अलावा दूसरा कोई दस्तावेज अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए नहीं है। जिनके पास है, वह तो दे रहे हैं लेकिन जिनके पास नहीं है वह आखिर क्या करें?
👉🏻 अधिकारियों की हड़बड़ी ने भी बढ़ाई सी वोटरों की संख्या
कई बीएलओ ने यह भी बताया कि SIR के प्रथम चरण में पत्रक को समय पर जल्द जमा लेने और एंट्री करने के लिए अधिकारियों के द्वारा लगातार कहा जाता रहा। ऐसे वक्त में कई वोटर अपने पता पर नहीं मिले जिन्हें तलाशना मुश्किल हो रहा था और इनके पत्रक एंट्री न होने के कारण शत-प्रतिशत कार्य भी प्रदर्शित नहीं हो रहा था तब जिम्मेदार अधिकारियों ने इन सबको सी केटेगरी में डालने का निर्देश दिया। अब ऎसे लोगों को भी नोटिस जारी हो रही है किंतु तामील करा पाने में बीएलओ के पसीने छूट जा रहे हैं,क्योंकि ये लोग अनुपस्थित/शिफ्टेड मतदाता की श्रेणी में हैं। अब इनके लिए पंचनामा बनवाकर देना पड़ रहा है जिस पर हस्ताक्षर कराने में कई बीएलओ परेशान हो रहे हैं क्योंकि जल्दी से कोई किसी वोटर के लिए अपना नाम नहीं लाना चाहता।








