0 कलेक्टर के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां! जनपद सीईओ के आदेश पर बनी 7 सदस्यीय जांच टीम अब तक नहीं पहुंची मौके पर
कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा के ग्राम पंचायत तिलकेजा से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में जांच को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। जनपद पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट रूप से सात सदस्यीय जांच दल गठित कर तीन दिवस के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी आज तक न तो जांच टीम मौके पर पहुंची और न ही कोई प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है।
जानकारी के अनुसार, जनपद सदस्य किशन लाल कोसले की शिकायत पर कलेक्टर की समय-सीमा बैठक के निर्देश के बाद यह जांच दल गठित किया गया था। आदेश में एसडीओ, उपअभियंता, कार्यक्रम अधिकारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी एवं तकनीकी सहायक सहित सात अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। साथ ही स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि तीन दिनों के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए, ताकि मामला उच्च कार्यालय को भेजा जा सके।
हैरानी की बात यह है कि आदेश की समय-सीमा समाप्त हुए काफी समय बीत जाने के बावजूद जांच प्रक्रिया शुरू तक नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कलेक्टर के निर्देशों और जनपद सीईओ के आदेश की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है? यदि जांच समय पर नहीं होनी थी तो तीन दिन की समय-सीमा तय करने का औचित्य क्या था?
इस पूरे मामले में जांच लंबित रहने से शिकायतकर्ता सहित ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन अपने ही आदेशों का पालन नहीं करा पा रहा है तो पारदर्शिता और जवाबदेही के दावे खोखले साबित होते हैं। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब होगा या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।











