👉🏻 क्या किसी की तय नहीं होगी जवाबदेही..? जाँच की मंशा पर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। नगर पंचायत मरवाही में स्थापित भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर उठा विवाद अब और गहरा गया है। प्रतिमा में दिखाई दे रही दरारों और चेहरे की उड़ रही रंगत पर पॉलिश और मररमत की लीपापोती ने नीति और नीयत पर सवाल उठा दिए हैं।
कटघोरा में अटल जी की प्रतिमा की उखड़ती परतों से माना कि कहीं बेहतर मरवाही नगर पंचायत की प्रतिमा हो सकती है लेकिन लाखों की मूर्ति की अगर यूं ही रंगत उड़ने लगे और कांस्य धातु की मूर्ति पर जगह-जगह से दरारें आने लगे तो जांच और जवाबदेही की दरकार तो होती है। इसके विपरीत जब यह खबर मुद्दे के रूप में सामने आया तो आज सोमवार को दफ्तर खुलने के बाद चेहरे पर पॉलिश और प्रतिमा के कई हिस्सों की दरारों पर मरम्मत की लीपापोती शुरू की गई।
ताजा तस्वीरों में प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों पर नई परत, पुट्टी और मरम्मत के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। यह बदनीयती को छिपाने का प्रयास तो है लेकिन डेंटिंग-पेंटिंग से वह चमक और रौनक क्या वापस लाई जा सकेगी, जो ओरिजनल में होती। इस मरम्मत कार्य के खर्च की भरपाई कौन करेगा, खर्च किसके सिर मढ़ा जाएगा? हालांकि, इस संबंध में नगर पंचायत अथवा संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
👉🏻बिना तकनीकी जांच मरम्मत?
अब उठने वाला बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रतिमा की पहले किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी से जांच कराई गई या सीधे मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया? यदि तकनीकी परीक्षण हुआ है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि जांच नहीं हुई, तो फिर इतनी जल्दबाजी में मरम्मत करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? अटल जी की कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण सार्वजनिक धन से कराया गया है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री, गुणवत्ता या स्थापना प्रक्रिया में कोई तकनीकी कमी रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है। केवल सतही मरम्मत कर देना उन मूल सवालों का जवाब नहीं माना जा सकता, जो प्रतिमा में आई दरारों को लेकर उठाए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पूरे मामले में आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या केवल मरम्मत तक मामला सीमित रहेगा या निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच भी कराई जाएगी?


















