बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा बेजा आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से यूजीसी के नियमों के अवहेलना और अनदेखी करते हुए आर्थिक लेन-देन करके प्रदेश के कई निजी महाविद्यालयों को तकनीकी उच्च शिक्षा संचालन करने की अनुमति देने का खुलासा हुआ है।
स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई और उसके अधीनस्थ निजी महाविद्यालयों द्वारा यूजीसी के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इसकी जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार जितेन्द्र कुमार साहू को होने पर उसके द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दस्तावेज निकाला गया और दस्तावेज के आधार पर स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई और उसके अधीनस्थ महाविद्यालयों के खिलाफ 19 बिन्दुओं पर संबंधित विभाग के उच्च स्तरीय शिकायत किया गया जिस पर जांच दल गठित कर जांच किया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार शिकायतकर्ता के शिकायत के 10 बिन्दु सही पाये गये हैं लेकिन स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय और उसके अधीनस्थ महाविद्यालयों पर किसी प्रकार की कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की गई। तब शिकायतकर्ता ने स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डा. एम. के.वर्मा, कुलसचिव डा. के.के.वर्मा, प्रभारी संबद्धता शाखा डा. दीप्ति वर्मा, तत्कालीन कुलसचिव जी.आर.साहू, तत्कालीन कुलसचिव डी.एन.सिरसांत के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए इसकी शिकायत छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) रायपुर से की गई।
स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय
छत्तीसगढ़ लोक आयोग रायपुर के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति आई. एस. उबोबेजा ने शिकायतकर्ता के शिकायत की बिन्दुवार जांच पड़ताल की। जांच और दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाई गई! छत्तीसगढ़ लोक आयोग रायपुर द्वारा स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलसचिव के.के.वर्मा व अन्य के खिलाफ कार्यवाही करने आदेश जारी किया है।
तत्कालीन कुलसचिव के.के.वर्मा द्वारा अपने विरुद्ध हुए छत्तीसगढ़ लोक आयोग रायपुर के आदेश के विरुद्ध में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर किया गया है जो अभी लंबित है।
उच्च शिक्षा में खिलवाड़, लेन-देन कर कॉलेजों में तकनीकी शिक्षा संचालन की नियमविरुद्ध अनुमति, कार्रवाई लंबित






