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भगवान से प्रेम करना स्वाभाविक है : मृदुल कांत शास्त्री

Admin
Last updated: 05/09/2024 11:47 PM
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3 Min Read
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कोरबा। श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के अंतर्गत वृंदावन के आचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए बताया कि भगवान से प्रेम करना अत्यंत स्वाभाविक है, हमारे स्वभाव का एक हिस्सा है। इसे हमेशा अपने भीतर धारण करने की जरूरत है। आप जब भगवान से प्रीति करते हैं तो अनुकंपा आप पर असीम हो जाती हैं।

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      ट्रांसपोर्ट नगर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय संस्कृतिक भवन आशीर्वाद प्वाइंट्स में कबुलपुरिया परिवार के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया है जहां पर दूसरे दिवस की कथा में आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति अपने सगे संबंध के लोगों से अत्यंत उदार भाव से प्रीति करता है इसलिए भगवान से प्रीति करने के लिए किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए ,कोई दूरी नहीं होना चाहिए। भगवान को निश्छल प्रेम करने वाले अत्यंत प्रिय होते हैं।  उनकी पुकार पर भगवान अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं। यह पूरा विषय कुल मिलाकर भाव की प्रधानता से जुड़ा हुआ है। 

    कथावाचक ने श्रीमद् भागवत कथा के 7 दिन और राजा परीक्षित के जीवन से जुड़े 7 महत्वपूर्ण दिनों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा में 7 दिन तक प्रभु के नाम की चर्चा होती है और जो हमारे जीवन को सार्थकता देती है। राजा परीक्षित की मृत्यु का कारण बने तक्षक नाग से संबंधित समीकरण को भी उन्होंने स्पष्ट किया। बताया गया कि उस दौरान कौशुकी की नदी के जल से सिद्धपुरुष ने श्राप दिया गया था, वही नदी कोसी आज एक प्रदेश का सर्वकालिक शोक बन गई है।

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      सकारात्मक चीजों का करें समर्थन

      कथावाचक ने जनसाधारण को प्रेरक प्रसंग से जोड़ते हुए इस बात की चर्चा कीजिए हाल में ही इस सदी का सबसे बड़ा वैवाहिक समारोह संपन्न हुआ। कई कारण से इसकी चर्चा विश्व स्तर पर हुई है। दूसरी चीजों को इसमें शामिल न भी किया जाए तो लोगों का ध्यान उस घटना ने अपनी तरफ खींचा है जिसमें आयोजकों ने अतिथियों को भगवान गिरिराज की छवि वाली भेंट देकर उदाहरण प्रस्तुत किया है। समाज को ऐसे सभी सकारात्मक विषय का समर्थन करना चाहिए।

      0 मन मोहा आकर्षक झांकी ने

      कथा के दूसरे दिन भगवान के बाल स्वरूप की झांकी प्रस्तुत की गई किसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्तजनों के द्वारा पूजन अर्चन करने के साथ आशीर्वाद लिया गया।

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