👉🏻 अध्यक्ष सहित सदस्यों ने लगाया घोर उपेक्षा का आरोप, सदस्यों के पति भी प्रदर्शन में रहे मौजूद
कोरबा। जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यप्रणाली और डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर जिला पंचायत में आज उबाल देखा गया। जिला पंचायत के गलियारे में सोमवार को उस समय हलचल मच गई, जब भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह सहित कई जिला पंचायत सदस्य और उनके पति भी जिला पंचायत कार्यालय परिसर में धरना पर बैठ गए। प्रदर्शन में सदस्यों के पति की मौजूदगी और सक्रियता चर्चा का विषय है बनी रही
जिला पंचायत सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। अध्यक्ष द्वारा कहा गया कि सीईओ क्या करते हैं, इसकी हमारे पास रिकॉर्डिंग है। ऐसे अधिकारी सरकार को बदनाम करते हैं, वे बड़े एटीट्यूड में रहते हैं। 20-25 साल मुझे हो गया है और 16 सीईओ मेरे कार्यकाल में यहां रह चुके हैं किंतु इनके जैसा CEO नहीं देखा जो जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं देते। इनके द्वारा जिस तरह से सामान्य सभा को दरकिनार किया जा रहा है, मनमानी कर रहे हैं, यदि यही हालात रहे तो हम 1 महीने का समय सदन को दे रहे हैं, यदि इसके बाद भी नहीं सुधरे तो 1 महीने बाद 10 जून को जिला पंचायत में ताला लगा दिया जाएगा।
👉🏻 तीन घण्टे इंतजार के बाद भी नहीं आए सीईओ
जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने बताया कि जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर उनके चेंबर में सभी जनपद सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं को लेकर चर्चा होनी थी। बैठक में सीईओ दिनेश कुमार नाग को भी बुलाया गया लेकिन करीब तीन घंटे इंतजार कराने के बाद भी उनके नहीं पहुंचने पर अध्यक्ष और सदस्य नाराज हो गए। जिला पंचायत परिसर में ही धरना पर बैठ गए। इस दौरान जिला सीईओ अपने चैंबर से निकलकर जाने लगे तो उन्हें रोक कर सदस्यों ने बात करना चाहा किंतु अभी टाइम नहीं है कह कर जिला सीईओ वहां से निकल गए। इसके बाद सीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के कार्यों को महत्व नहीं दिया जाएगा और समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो सभी सदस्य इस्तीफा देकर घर बैठने को मजबूर होंगे।
👉🏻 लगाया यह आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को दरकिनार कर प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। डीएमएफ की राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, लेकिन योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मनमानी के कारण पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है। यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों में जिला पंचायत में कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की बात ही नहीं सुनी जाएगी, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्व ही समाप्त हो जाएगा। जिला पंचायत परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। भाजपा समर्थित सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बंद नहीं की और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।






