👉🏻 एक वेतन वृद्धि रोकने का दण्ड भी इसी महीने मिला है मिश्रा को
कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन की मंशा को धता बताते हुए साय सरकार के सुशासन तिहार शिविर में ही रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-2 प्रदीप मिश्रा को शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। इसी महीने में ही एक अन्य प्रकरण में प्रदीप मिश्रा को दंड स्वरूप एक वेतन वृद्धि रोकने की सजा से दंडित किया जा चुका है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में लेख है कि-कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो, बिलासपुर (छ.ग.) का पत्र क्रमांक/उपुअ/ए. सी.बी./एम.टी./Q2/2026, कैम्प तुमान, दिनांक 29.05.2026 द्वारा सूचना प्राप्त हुई है कि एसीबी / ईओडब्ल्यू इकाई, बिलासपुर के अपराध क्रमांक 0/2026, धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथा संशोधित अधिनियम, 2018 के मामले में दिनांक 29.05.2026 को आरोपी प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को प्रार्थी अमृत बघेल से रिश्वत की रकम 40,000/- रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। उक्त अपराध धारा के मामले में प्रदीप मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल में निरुद्ध किया गया है। प्रदीप मिश्रा का उक्त कृत्य सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है। अतः प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा नियत किया जाता है। इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
👉🏻 सेवा पुस्तिका मामले में भी मिला दण्ड
विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा को 11 मई 2026 को जारी पत्र अनुसार- शेख कसीम मोहम्मद, शिक्षक (एल.बी.), शासकीय शाला चंदरौटी, विकासखण्ड पोड़ी उपरोड़ा की मूल सेवा पुस्तिका गुम होने संबंधी कार्यवाही हेतु प्रेषित पत्र प्राप्त हुआ। प्रकरण के परीक्षण उपरांत संबंधित प्रभारी लिपिक अभिषेक आहेर, सहायक ग्रेड-02 तथा प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उनकी आगामी एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दण्ड अधिरोपित किया गया है। उपरोक्त संबंध में उपलब्ध सेवा पुस्तिका की द्वितीय प्रति तथा मूल अभिलेखों के आधार पर शेख कसीम मोहम्मद, शिक्षक (एल.बी.) की सेवा पुस्तिका की द्वितीय प्रति तैयार करना सुनिश्चित करें।
👉🏻 कदाचरण से रहा है पुराना नाता,अधिकारियों का नाम लेते रहे
सहायक ग्रेड 2 प्रदीप मिश्रा जो कि बीईओ कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ हैं, इनके कदाचरण का यह कोई पहला मामला नहीं बल्कि पहले भी वह इस तरह के कारनामे कर चुके हैं लेकिन पकड़े नहीं गए। अभी 40000 रुपए रिश्वत लेने के मामले में मिश्रा से पूछताछ की गई तो अपने बीईओ और जिला ट्रेजरी कार्यालय के अधिकारी का नाम लेते हुए कहने लगे कि उनके कहने पर यह सब कर रहा था और इन्हें भी हिस्सा देना पड़ता है। हालांकि, ACB की पूछताछ में इनका यह कथन निराधार साबित हुआ। इसके पहले बीईओ जोगी के कार्यकाल में हुई वित्तीय अनियमितता और विभागीय काम में लापरवाही के कारण उन पर निलंबन की गाज पहले भी गिर चुकी है। बार-बार कार्रवाई होने के बावजूद उनकी आदत में सुधार का न होना स्वेच्छाचारिता को ही प्रदर्शित करता है। इस प्रवृत्ति के शासकीय सेवकों को यह पता है कि निलंबन से अधिक और कोई कार्रवाई नहीं होनी है इसलिए इन्हें कोई फर्क भी नहीं पड़ता।






