👉🏻 युवा अधिवक्ता प्रिंस अग्रवाल की मजबूत व तथ्यात्मक पैरवी से दंपत्ति को मिला न्याय
👉🏻 समाज में मिलाने कुल 5 लाख रुपये मांग रहे थे पदाधिकारी
👉🏻 पीड़ित के आवेदन पर सिविल लाइन थाना में जांच के नाम हुई लीपापोती
कोरबा। सामाजिक विवाह के बावजूद दंपति को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर देने के मामले में दायर परिवाद पर न्यायाधीश ने समाज के दोषी चार (पूर्व और वर्तमान) पदाधिकारी के विरुद्ध अपराध पंजीबद करने का आदेश जारी किया है। दर-दर भटकते दंपति ने सिविल लाइन थाना रामपुर और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई थी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। सिविल लाइन थाना प्रभारी द्वारा जांच के नाम पर लीपापोती की गई, जिस पर न्यायालय ने टिप्पणी की है।
युवा अधिवक्ता प्रिंस अग्रवाल ने बताया कि उनके पक्षकार की तरफ से प्रतिवादियों शेखर बंजारा पिता-राजकुमार बंजारा, निवासी ग्राम बटुरावहार, थाना पत्थलगांव, जिला जशपुर,2. महेन्द्र बंजारा पिता मोहन बंजारा, निवासी ग्राम कोतबा, थाना कोतबा, जिला जशपुर, 3. नंद किशोर बंजारा, पिता-डिबु बंजारा, निवासी ग्राम कोतबा, थाना कोतबा, जिला जशपुर 4. श्यामलाल बंजारा पिता-दुखुराम बंजारा, निवासी ग्राम मेडर, थाना-फरसाबहार, जिला जशपुर सभी पदाधिकारीगण बंजारा समाज पत्थलगांव इकाई, जिला-जशपुर के विरुद्ध धारा-175 (3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 की धारा-7(2) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा-308 (2), 61(2), 3(5) के तहत अपराध के संबंध में अन्वेषण कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने हेतु आदेशित करने परिवाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सत्यानंद प्रसाद के समक्ष पेश किया गया।
👉🏻 यह है मामला
पीड़ित व्यक्ति ग्राम बटुराबहार, थाना-पत्थलगांव, जिला-जशपुर का मूल निवासी वर्तमान में अगस्त 2022 से कोरबा में प्राईवेट ठेका कंपनी में नौकरी करते हुए पोड़ीबहार में निवासरत् है। उसने 26.08.2022 को आर्य समाज मंदिर रायपुर में सजातीय युवती से विवाह किया। दोनों एक ही समाज से होते हुए परिवादी कर्णावत एवं पत्नी का गोत्र तिलावत है जो कि पृथक-पृथक गोत्र से आते हैं, किन्तु आरोपीगण के द्वारा यह कहा जाता है कि, यह दोनों गोत्र हम एक ही मानते हैं। एक ही गोत्र में शादी पर आपत्ति करते हुए तत्कालिन बंजारा समाज संपूर्ण जिला जशपुर के अध्यक्ष शेखर बंजारा व सचिव महेन्द्र बंजारा के द्वारा दंपत्ति तथा दोनों के पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिये, जिसकी वजह से दोनों परिवारों को समाज के अन्य लोगों के द्वारा किसी भी सामाजिक रीति-रिवाज एवं अन्य कार्यक्रम में निमंत्रण नही दिया जाता है।
और न ही समाज का कोई भी व्यक्ति दंपत्ति के घर / परिवार में आना-जाना करते हैं। दोनों परिवार स्वयं को अपमानित महसूस करते हुए विवश तथा हताश होकर परिवार वालों ने समाज के तत्कालिन पदाधिकारी से समाज में वापस जोड़ने बाबत करबद्ध निवेदन किये।
👉🏻 11 हजार से 5 लाख तक की मांग
अध्यक्ष व सचिव ने पीड़ित दोनों परिवार से 11,000/-रू. पृथक-पृथक की मांग करते हुए अतिरिक्त शर्त यह भी रखी कि परिवादी एवं परिवादी की पत्नी से दोनों के परिवार के लोग किसी भी प्रकार का कोई आना-जाना एवं संबंध नही रखेंगे। समाज से बहिष्कृत होने के अपमान से विवश होकर परिवादी एवं उसकी पत्नी के परिवार के सदस्यों के पास और कोई अंतिम विकल्प न होने से 11,000/-रू. पृथक-पृथक माह फरवरी 2023 में आरोपी को प्रदान किया एवं दबाव पूर्वक थोपे गये गैर कानूनी शर्तों से डरकर दंपत्ति को अपने ही घर में बुलाना एवं सभी प्रकार का आना-जाना बंद करते हुए सारे संबंध तोड़ दिये।
महीनों उपरांत भी जब घर वालों के द्वारा इन्हें नहीं अपनाया गया तो मजबूरीवश अध्यक्ष-सचिव से मिलकर समाज में जोड़ने का आग्रह किया तब 2 लाख रूपए की अनुचित मांग की। भयादोहन करते परिवादी को धमकी दी गई कि पैसा नहीं देगा तो तुझे और तेरी बीवी को जीवन भर समाज में कहीं आने-जाने लायक नहीं छोड़ेंगे। विवश होकर अपनी जमा पूँजी 60,000/- रूपये, अपने बैंक एकाउण्ट से एवं 40,000/- रूपये, अपने भाई हातीम बंजारा से उधारी मदद मांगते हुए अध्यक्ष के एकाउंट में ट्रान्सफर करवाया। शेष 1 लाख रूपये अध्यक्ष व सचिव द्वारा कोरबा आकर परिवादी के निवास से सितम्बर 2022 में परिवादी के मित्र अजय कुमार की उपस्थिति में प्राप्त किये। इसके बाद पृथक से समाज में जोड़ने वास्ते 3 लाख रूपये अतिरिक्त रकम की मांग करते हुए परिवादी को समाज में वापस जोड़ने वाली बात को लेकर टाल-मटोल करने लगे।
👉🏻 नए अध्यक्ष-सचिव ने भी नहीं की सुनवाई
मार्च 2024 तक दोनों बंजारा समाज के अध्यक्ष एवं सचिव के पद पर थे एवं परिवादी से उद्यापित रकम वसूल करते हुए समाज से बहिष्कृत रखा। माह अप्रैल 2024 में बंजारा समाज के अध्यक्ष पद पर नंदकिशोर बंजारा एवं सचिव के पद पर श्याम लाल बंजारा के द्वारा कार्य भार संभाला गया। इनसे पीड़ित ने पूर्व में समाज में जोड़ने वास्ते उद्यापित की गई रकम संबंधी बातों को बताते हुए समाज में वापस जोड़ने हेतु आवेदन किया, जिस पर पावती देने से इंकार कर दिया गया। अंततः थक-हार कर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली किंतु वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय में अधिवक्ता प्रिंस अग्रवाल के माध्यम से परिवाद पेश किया।
👉🏻थाना प्रभारी ने कर्तव्यों का उल्लंघन किया
न्यायाधीश ने सभी पक्षों के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन एवं परीक्षण किया। इसके पश्चात परिवाद का निराकरण करते हुए कहा कि- संबंधित थाना प्रभारी, सिविल लाईन रामपुर कोरबा द्वारा आवेदक को शिकायत प्राप्त करने के पश्चात पावती नहीं देना और न्यायालय के आदेश के पश्चात भी सम्यक अन्वेषण नहीं करना मामले में संदेह उत्पन्न करता है। अतः कहा जा सकता है कि थाना प्रभारी, सिविल लाईन रामपुर कोरबा द्वारा प्रकरण में प्रथम सूचना पत्र पंजीबद्ध ना करके अपने कर्तव्यों का पालन ना करते हुये अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया है।
👉🏻 3 दिन के भीतर दर्ज करें एफआईआर
न्यायाधीश ने समग्र अभिलेख के अवलोकन उपरांत थाना प्रभारी, सिविल लाईन रामपुर कोरबा को इस आदेश पत्रिका की प्रतिलिपि एवं परिवाद पत्र की प्रतिलिपि प्रेषित कर आदेश दिया है कि तीन दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से उपरोक्त चारों व्यक्तियों शेखर बंजारा, महेन्द्र बंजारा, नन्द किशोर बंजारा एवं श्याम लाल बंजारा के विरूद्ध समुचित धाराओं के अंतर्गत प्रथम सूचना पत्र पंजीबद्ध करें तथा पालन प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करें और पूर्णतः स्वच्छ अन्वेषण कर अंतिम प्रतिवेदन संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत करें।







