कोरबा। कोरबा जिले में नए कलेक्टर के तौर पर कुणाल दुदावत की पदस्थापना हुई है और उन्होंने आज अपना पदभार भी संभाल लिया। नए कलेक्टर के आने के साथ ही कोरबा जिले में चल रही कई तरह की अवैधानिक गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ ही रोक लगने की उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
कोरबा जिले में एक सबसे बड़ी समस्या के रूप में अवैध खनिज का खनन और परिवहन बड़ी तेजी से उभरा है। सरकार बदलने के बाद उम्मीदें थी कि इस पर रोक लगेगी लेकिन यह तो और भी भयावह तरीके से बढ़ता ही जा रहा है। कोई भी नदी- नाला नहीं छूट रहा जहां रेत माफिया सीधे जेसीबी लगाकर और ट्रैक्टर उतार कर अवैध खनन व परिवहन ना कर रहे हैं। कहीं सरकारी योजनाओं की आड़ में तो अधिकांशत: निर्माण कार्यों का हवाला देकर और इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर भंडारण कर रेत की कालाबाजारी करने के लिए रायल्टी ना होने के बावजूद बेखौफ और मनमाने तरीके से नदियों को खोद कर न सिर्फ जलस्तर घटाने का काम किया जा रहा है बल्कि इसके अस्तित्व से भी खिलवाड़ हो रहा है। इनकी वजह से आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। निश्चित ही नए कलेक्टर के लिए रेत सहित अन्य खनिज के माफियाओं पर नकेल कसना किसी चुनौती से काम नहीं होगा।
👉🏻दूसरी चुनौती मनरेगा विभाग में वर्षों से जमे अधिकारी बनकर काम कर रहे कर्मचारी हैं जो कलेक्टर तो बदलते रहे लेकिन अपना सिक्का मनरेगा में एक ही जगह पर जमा कर रखे हुए हैं। पूर्व कलेक्टर अजीत बसंत ने मनरेगा में बड़े घोटाले उजागर होने पर कटघोरा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए सेवा समाप्त कर दिए लेकिन जिला सहित ब्लॉक स्तरों पर कई ऐसे कर्मचारी आज भी पदस्थ हैं जो सालों साल से एक ही जगह पर जमे हुए हैं और मनरेगा के पैसों की बंदरबांट करने में माहिर हैं। मनरेगा में कार्य हुए बिना ही फर्जी हितग्राही, फर्जी जिओ टैगिंग के सहारे प्रधानमंत्री आवास से लेकर अन्य निर्माण कार्यों को पूरा बताकर, एक पूर्ण कार्य की आड़ में दो कार्य की राशि निकाल कर लाखों-करोड़ों रुपए के गबन किए गए हैं। मामला उजागर होने पर एकाध कार्रवाई करने के बाद छोटे कर्मचारी जैसे रोजगार सहायक पर एक्शन ले लिया जाता है लेकिन इसमें शामिल जिला से ब्लाक तक अन्य संगठित लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने से उनके मनोबल लगातार बढ़े हुए हैं, और वह मनरेगा में भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। अपवाद स्वरूप कुछ कर्मचारी अपना ईमान बरकरार रखे हुए हैं जबकि अधिकांश मनरेगा का सिर्फ दोहन कर रहे हैं। मनरेगा सहित अन्य विभागों में भी एक स्थान पर वर्षों से जमे लोगों को हटाना जरूरी है।
👉🏻तीसरी बड़ी चुनौती फ्लाई ऐश के परिवहन से लेकर इसे जहां पाए वहां डंप करने और कराने वालों को लेकर है। इन लोगों की वजह से आम जनता और प्रभावित क्षेत्र के लोग राखड़ खाने पर मजबूर हैं। दिन-रात यह लोग समस्या से जूझ रहे हैं। जहां पाए वहां, जैसा पाए वैसा रखड़ सड़कों के किनारे डंप कर देने से समस्या भयावह होती जा रही है। जल स्रोतों के आसपास भी राखड़ डम्प कर दिए जा रहे हैं। जो मामले समाचारों के जरिए उजागर होते हैं उन पर भी संबंधित विभागीय अधिकारी कार्रवाई तो दूर जांच करना भी जरूरी नहीं समझते और लीपापोती कर देते हैं। फ्लाई ऐश से गड्ढों को पाटने की आड़ में मनरेगा निर्मित तालाब को पाटने के साथ-साथ जिंदा तालाब को भी दफन करने का काम इस जिले में हो रहा है। ऐसे तमाम और भी मामले हैं जो समय-समय पर उजागर किए जाते रहेंगे लेकिन नवपदस्थ कलेक्टर के लिए यह तीन चुनौतियां सबसे बड़ी है। इनके अलावा सड़क,बिजली, नाली,पानी,बढ़ता अतिक्रमण, भूविस्थापितों के बसाहट, मुआवजा, रोजगार की लंबित समस्याएं तो हैं ही।
कोरबा कलेक्टर के लिए अवैध रेत,मनरेगा में अंगद बने कर्मी,यहां-वहां फ्लाई ऐश चुनौती से कम नहीं





